नागौर के 500 साल पुराने संत चतुरदासजी मंदिर में 22.78 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का खुलासा, जांच समिति ने 11 लोगों पर केस दर्ज करने की सिफारिश की

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Alleged scam worth ₹22.78 crore unearthed at the 500-year

जयपुर। अयोध्या के राम मंदिर के बाद अब राजस्थान के नागौर जिले में स्थित करीब 500 वर्ष पुराने संत श्री चतुरदासजी महाराज के मंदिर में 22.78 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। मंदिर प्रबंध समिति पर पिछले छह माह से लग रहे लगातार आरोपों के बाद नागौर के जिला कलेक्टर ने एसडीएम के नेतृत्व में 13 सदस्यीय एक जांच कमेटी गठित की थी।

कमेटी ने 23 जून को जिला कलेक्टर को अपनी रिपोर्ट सौंपी। जांच समिति के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में लगभग 15.20 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में सात करोड़ 58 लाख रुपये के गबन के संकेत मिले हैं।

समिति ने मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह सहित 11 सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने और अन्य प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की है। बता दें कि मान्यता है कि संत चतुरदास जी की समाधि पर सात दिन परिक्रमा एवं प्रार्थना करने से लकवा के मरीज ठीक हो जाते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, दान में मिली सोने-चांदी एवं नकद राशि का सही रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। साथ ही मंदिर में भोजनशाला के निर्माण व मंदिर की दुकानों के किराये का सही लेखा-जोखा दर्ज नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2024-25 में पूर्व समिति से वर्तमान समिति को 36 किलो चांदी और 20 ग्राम सोना प्राप्त हुआ था, लेकिन नई समिति ने अपने रिकार्ड में 35.5 किलो चांदी और 280 ग्राम सोना दर्शाया है।

इसके अलावा करीब दो करोड़ 60 लाख रुपये मूल्य की मंदिर संपत्ति का रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं मिला। विकास कार्यों पर मंदिर समिति ने 31.37 लाख रुपये खर्च करना दर्शाया है, लेकिन न तो संबंधित ठेकेदार का नाम उपलब्ध कराया गया और न ही भुगतान संबंधी कोई रसीद प्रस्तुत की गई।

इसी तरह फर्नीचर खरीद पर 97.48 लाख रुपये और मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों लगाने के नाम पर 82.41 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि जांच समिति को इन खर्चों के समर्थन में बिल या अन्य दस्तावेज नहीं मिले। एसडीएम ने रिपोर्ट में बताया है कि मंदिर समिति ने केवल एक वर्ष का रिकॉर्ड ही जांच के लिए उपलब्ध कराया।

अध्यक्ष ने जांच रिपोर्ट को बताया फर्जी

मंदिर समिति अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने सोमवार को जांच रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए कहा कि एसडीएम ने दुर्भावना से एकतरफा कार्रवाई की है। कलेक्टर ने 13 सदस्यीय कमेटी बनाई थी लेकिन कभी कमेटी के सभी सदस्य एक साथ जांच के लिए नहीं पहुंचे। साथ ही मंदिर समिति को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। निर्माण कार्यों की लागत एवं किराया रिकॉर्ड में दर्ज है।